एक मां ने प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन की चाह में कहा.

प्रधानमंत्री सवाल के बीच में ही हंस पड़े थे. सवाल ख़त्म होने पर कॉमिक पंच मारने के अंदाज़ में बोले, ‘ये पबजी वाला है क्या?’

पूरा हॉल ठहाके लगाने लगा. चिंतित मां भी हंस पड़ी. तालियों से हॉल गूंज उठा. इसके बाद प्रधानमंत्री ने ‘फ्रंटलाइन’ का भी जिक्र कि

 

पबजी और बचपन

 

लेख में आगे लिखा हुआ है कि सुभाष और उनके बेटे प्रणव की समस्या यहां ख़त्म नहीं हुई. प्रणव इतना बड़ा एडिक्ट हो चुका था कि उसका वजन घटने लगा था. जब उसका लैपटॉप और मोबाइल उससे छीना गया, उसने घरवालों को आठवें फ्लोर से कूदकर आत्महत्या करने की धमकी दी. गुस्से में एक दरवाजा तोड़ डाला. प्रणव को अंततः दिमाग के अस्पताल ले जाना पड़ा.

बच्चों पर पड़ते इसके प्रभाव को देख देश में कुछ जगह पबजी को बैन भी किया गया. मगर जो चीज़ इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध हो उसे बैन करना मुश्किल है. पबजी का दायरा सेंसर और सरकारों के बाहर था.

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