NEW DELHI, INDIA - FEBRUARY 7: Indian Muslim women are passing by a group of police men at old Delhi area to cast their vote at nearest polling booth during the Delhi Assembly Elections 2015, on February 7, 2015 in New Delhi, India. Delhi is headed for a record turnout on Saturday as more than 69.5% of the city's 1.33 crore voters cast their ballot till 5pm. After a slow start in the morning, polling picked up around noon, with scores of people queuing up at booths to exercise their franchise in an electrifying electoral battle that the national capital has never witnessed before. 69.5 per cent of 1.3 voters had been inked by 5 pm on Saturday, as Delhi looked set for a record turnout after a slow morning. There are 673 candidates in the fray now. Voting is taking place in 11,763 centers, located in schools. Many initial voters in middle class and posh areas were early morning walkers. (Photo by Subrata Biswas/Hindustan Times via Getty Images)

कुछ दिन पहले गाज़ियाबाद पुलिस को एक सूटकेस में एक महिला का शव मिला था. दिल्ली में रहने वाले एक परिवार ने शव की पहचान अपने घर की लड़की के तौर पर की थी. जिसके बाद बुलंदशहर में रह रहे लड़की के ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज करवाया गया था. अब खबर आई है कि शव जिस लड़की का माना जा रहा था, वो ज़िंदा है. और अलीगढ़ में मिली है. इस बात की जानकारी बुलंदशहर की पुलिस ने गाज़ियाबाद की पुलिस को दी.

क्या है पूरा मामला?

‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बुलंदशहर CO सिटी दीक्षा सिंह ने गाज़ियाबाद पुलिस का एक लेटर लिखा. कहा,

“जांच में ये सामने आया है कि वरिशा (जिसे मृत माना जा रहा था), ज़िंदा है और इस वक्त बुलंदशहर में ही है. वरिशा के भाई ने शव की गलत पहचान की थी. ये जानकारी गाज़ियाबाद में सूटकेस में मिली महिला के शव के केस में जारी की जा रही है.”

बुलंदशहर पुलिस के मुताबिक, वरिशा को पति और ससुराल वाले कथित तौर पर पीटते थे, जिसके बाद उसने बिना किसी को बताए भागने की प्लानिंग की. वो घर छोड़कर पहले नोएडा गई अपने एक दोस्त के पास, फिर अलीगढ़ चली गई. वरिशा के मिलने के बाद उसके ससुराल वालों पर IPC की धारा 304बी(2) (दहेज हत्या) के तहत जो केस दर्ज हुआ था, उसे हटा लिया गया, हालांकि 498(ए) (घरेलू हिंसा) का केस अभी भी दर्ज है.

क्या हुआ था 27 जुलाई को?

गाज़ियाबाद पुलिस को साहिबाबाद इलाके से एक सूटकेस में एक महिला का शव मिला था. पुलिस ने जांच के लिए आस-पास के ज़िलों की पुलिस से भी जानकारी मांगी. शव की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुई. फिर दिल्ली के एक परिवार ने गाज़ियाबाद पुलिस से कॉन्टैक्ट किया, जिन्होंने शव को पहचानने का दावा किया. पुलिस ने परिवार को गाज़ियाबाद बुलाया, जिन्होंने उस शव को वरिशा का शव बताया.

गाज़ियाबाद सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) सिटी मनीष मिश्रा कहते हैं,

“शव मिलने के बाद ज़रूरी जांच की गई. हमने वॉट्सऐप और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में मैसेज सर्कुलेट किया, इस उम्मीद से कि कोई विश्वसनीय जानकारी मिलेगी. जब वरिशा का परिवार हमारे पास आया, तो हमने बुलंदशहर पुलिस से क्रॉस-चेक किया. अब लग रहा है कि परिवार ने शव की गलत पहचान कर ली थी. हम अब विक्टिम की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं.”

वरिशा के मिलने के बाद अब गाज़ियाबाद पुलिस सूटकेस में मिले शव वाले मामले की दोबारा जांच शुरू करेगी. उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन पुलिस ने DNA टेस्टिंग के लिए सैंपल्स ले लिए थे, जिनके नतीजे आने अभी बाकी हैं.

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