KOLKOTA, INDIA - FEBRUARY 18: Harbhajan Singh of India celebrates winning the match with 10 balls remaining during day five of the Second Test match between India and South Africa at Eden Gardens on February 18, 2010 in Kolkata, India. (Photo by Duif du Toit/Gallo Images/Getty Images)

साल 1990 से लेकर 2008 तक अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट के ऐसे फाइटर रहे, जिन्होंने भारतीय टीम के लिए न सिर्फ मैच बचाए, बल्कि जिताए भी. लेकिन 1998 में टीम इंडिया के इस लिजेंड को साथ मिला एक 18 साल के पतले-दुबले सरदार का. शुरुआत में जिन कुंबले की वजह से भज्जी की टीम में जगह नहीं बन पा रही थी, बाद में उन्हीं कुंबले के साथ मिलकर भज्जी ने ऐसी जोड़ी बनाई कि फिर विरोधी टीमों का असर भारत के खिलाफ बेअसर होने लगा.

हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट के ‘ग्रेट’ हैं. उन्होंने अपनी कमाल की स्पिन गेंदबाज़ी से खूब नाम कमाया और अपने भिड़ जाने वाले एटीट्यूड से विवादों में भी रहे. फिर चाहे वो विवाद ऑस्ट्रेलिया में हुआ ‘मंकीगेट’ हो या फिर श्रीसंत के साथ ‘थप्पड़ कांड’. लेकिन उनके साथ एक विवाद तो ऐसा हो गया, जो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा.

वैसे तो हरभजन सिंह की टीम इंडिया में एंट्री अज़हर की कप्तानी में ही हो गई थी. लेकिन 2001 में सौरव गांगुली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रही, जिसके बाद भज्जी टीम में फिक्स हो गए.

जब न्यूज़ीलैंड एयरपोर्ट पर रोक दी गई भज्जी की एंट्री

साल 2002 के आखिर में दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम को न्यूज़ीलैंड जाना था. लेकिन नवंबर के आखिर में न्यूज़ीलैंड दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले यानी 28 नवंबर को हरभजन की बहन की शादी थी. उससे ठीक पहले वो मैच खेलने में व्यस्त थे. आनन-फानन में दौड़-भाग करते हुए 26 नवंबर 2002 की रात हरभजन विजयवाड़ा से मैच खेलकर जालंधर लौटे.

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