(FILES) A picture taken on March 30, 2011 shows a French Rafale fighter jet from the Istres military air base approaching an airborne Boeing C-135 refuelling tanker aircraft during a refuelling operation above the Mediterranean sea as part of military actions over Libya. French plane manufacturer Dassault will halt production of its Rafale fighter jet if it remains unable to sell any abroad, French Defence Minister Gerard Longuet said on December 7, 2011. AFP PHOTO/GERARD JULIEN (Photo credit should read GERARD JULIEN/AFP via Getty Images)

यह बयान 11 साल पहले यानी साल 2009 का है. एयरफोर्स में फाइटर जेट की कमी के सवाल पर तत्कालीन एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक ने यह जवाब दिया था. तब फ्रांस से रफाल विमान खरीदने की बातें चल रही थी. अब रफाल भारत आ चुका है. पांच रफाल फाइटर जेट 29 जुलाई को भारत आ गए. 27 जुलाई को इन्होंने फ्रांस से उड़ान भरी थी. रफाल को फ्रांसिसी कंपनी दसौ बनाती है.

रफाल की गिनती दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट में होती है.

भारत ने साल 2016 में फ्रांस से 58 हजार करोड़ रुपये में 36 रफाल लड़ाकू विमान का सौदा किया है. अभी जो पांच रफाल आए हैं, उनमें से तीन सिंगल सीटर और दो डबल सीटर हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि रफाल से भारतीय वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा. लेकिन रफाल से पहले इंडियन एयरफोर्स के पास कौन-से लड़ाकू विमान थे? आइए जानते हैं-

मिराज 2000

मिराज 2000 फाइटर जेट भी रफाल वाली कंपनी ही बनाती है.

कौन बनाता है

दसौ एविएशन. यही कंपनी रफाल फाइटर जेट भी बनाती है. मिराज 2000 को भारतीय वायुसेना में ‘वज्र’ भी कहा जाता है.

कीमत

एक मिराज 2000 लड़ाकू विमान की कीमत करीब 230 करोड़ रुपये के आसपास है.

खासियत

इसकी अधिकतम स्पीड 2495 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यह सिंगल सीटर और सिंगल इंजन विमान है. . यह विमान नौ तरह के अस्त्र ले जा सकता है. इसमें हाई फायरिंग रेंज की दो 30 एमएम बंदूकें लगी हैं. मिराज 2000 में 60 किलोमीटर दूर तक निशाना साधने वाली माइका मिसाइलें काम आती हैं. इससे 1000 किलो तक के लेजर गाइडेड बम गिराए जा सकते हैं. पुराना होने के बाद भी इसका वजन आधुनिक विमानों की तुलना में कम है. इससे युद्ध के मौकों पर मिराज 2000 को एडवांटेज मिलता है.

ट्रिविया

1999 में कारगिल की जंग में भारत की कामयाबी में मिराज 2000 का बड़ा योगदान था. इसके अलावा पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद मिराज 2000 से ही बालाकोट एयरस्ट्राइक की गई थी.

कब कमीशन हुआ

भारतीय वायुसेना में यह 1985 में पहली बार शामिल हुआ. पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के जवाब में भारत ने 1982 में 40 मिराज 2000 फाइटर जेट खरीदे थे. साल 2004 में 10 और मिराज 2000 विमान खरीदे गए थे.

जैगुआर

जगुआर विमान.

कौन बनाता है

इसे SEPECAT  नाम की कंपनी ने बनाया था. ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स और फ्रांस की एयरफोर्स के लिए. बाद में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसे बनाने का लाइसेंस ले लिया. इसे ‘शमशेर’ नाम से भी जाना जाता है.

कीमत

साल 2008 में एक जगुआर विमान की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये थी.

खासियत

यह लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने में सक्षम है. साथ ही तेज रफ्तार से नीचे भी उड़ान भर सकता है. यह सिंगल सीटर और टि्वन इंजन वाला विमान है. इसकी अधिकतम स्पीड 1350 किलोमीटर प्रतिघंटा है.

ट्रिविया

शुरू में भारत को जो जगुआर विमान मिले थे, वे पहले से ही ब्रिटिश एयरफोर्स में काम आ रहे थे. यह विमान परमाणु बम ले जाने की क्षमता रखता था. इस वजह से अमेरिका ने ब्रिटेन और भारत की डील को रोकने की खूब कोशिश की थी.

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